परागुआयन चाको में खूम (Qom) महिलायें अपने क्षेत्र को संरक्षित करने के लिये संगठित हैं


लंबी कहानी छोटे में: ग्रीन क्लाइमेट फंड (GCF) पैराग्वे सहित लैटिन अमेरिका और उप-सहारा अफ्रीका में सात लक्षित देशों में नये वृक्षारोपण में निवेश कर रहा है। पराग्वे में, विभिन्न कर्ता – कृषि व्यवसाय से लेकर एनजीओ तक – स्वदेशी भूमि पर पहले से ही यूकेलिप्टस मोनोकल्चर वृक्षारोपण कर रहे हैं और पानी की कमी, जैव विविधता का नुकसान और मिट्टी का क्षरण कर रहे हैं। GCF को इन अनुभवों से सीखना चाहिये और अपने संसाधनों को स्वदेशी महिलाओं और उनके समुदायों की क्षेत्रीय संप्रभुता के संरक्षण के सच्चे, जेंडर-न्यायपूर्ण जलवायु समाधान की ओर स्थानांतरित करना चाहिये।

अब की हकीकत: मोनोकल्चर वृक्षारोपण में निवेश

परागुआयन चाको एक सपाट और शुष्क क्षेत्र है, जिसमें ग्रीष्मकाल लंबा और गर्म होता है। यह जलवायु संकट के कारण होने वाले सूखे और बाढ़ के चक्रों के बीच झूलता रहता है,  जो पानी की पहुँच को प्रभावित करता है। क्षेत्र के स्वदेशी और ग्रामीण समुदाय लंबे समय से अपनी भूमि को निष्कर्षित करने वाली परियोजनाओं द्वारा तेजी से हो रहे अतिक्रमण से बचाने की कोशिश कर रहे हैं,  जिससे वनों की कटाई और पर्यावरणीय विनाश की दर ऊँची हुई है। इतनी ऊँची कि, ब्राज़ील में सेराडो के साथ, परागुआयन चाको आज लैटिन अमेरिका का वह क्षेत्र है जहाँ पशुपालन के लिये पुनरुद्देशित भूमि का सबसे बड़ा क्षेत्र है।

सांता रोजा के टोबा खूम स्वदेशी समुदाय के केस में, संघर्ष में “सतत विकास” का एक मॉडल शामिल है जो एनजीओ फंडासिओन परागुआ (Fundación Paraguaya) द्वारा उनपर थोपा जा रहा है। एनजीओ संगठन अपने एक गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम के हिस्से के रूप में खूम (Qom) क्षेत्र पर यूकेलिप्टस एकल कृषि (मोनोकल्चर) औद्योगिक वृक्षारोपण कर रहा है। खूम (Qom) समुदाय के पास 1,117 हेक्टेयर के सामूहिक संपत्ति के पट्टे हैं, जिसमें से Fundación Paraguaya 20 हेक्टेयर का उपयोग मोनोकल्चर के लिये करने की योजना बना रहा है और यह कार्य पूरे समुदाय के पूर्व परामर्श या स्वतंत्र और सूचित सहमति – जैसा कि वर्तमान नियमों द्वारा आवश्यक है – के बिना किया जा रहा है।

लाभदायक होने के लिये बागानों को बड़ी भूमि की आवश्यकता होती है, जिसके चलते समुदाय अपनी पारंपरिक भूमि और आजीविका से विस्थापित हो रहे हैं। भोजन और काम के स्रोत के रूप में उपयोग होने वाले पेड़ों और पौधों का विनाश समुदाय की, खासकर महिलाओं की भलाई, संस्कृति, संप्रभुता और स्वायत्तता को प्रभावित करता है, जो भोजन और हस्तशिल्पों की मुख्य उत्पादक हैं।

“हम यूकेलिप्टस वृक्षारोपण का विरोध करते हैं क्योंकि चाको में हमारे पास ज्यादा पानी नहीं है,” यह खूम (Qom) लीडर और Organización de Mujeres Artesanas de Santa Rosa (सांता रोजा की कारीगर महिलाओं का संगठन), जो जीवन, सामूहिक अधिकारों और सामाजिक-पर्यावरणीय अधिकारों की रक्षा के लिये समर्पित समूह है, उसके प्रमुख बर्नार्डा पेसोआ ने कहा। “हमारे पास हमारे कुएं हैं, हमारे पौधे फलदार हैं, और यूकेलिप्टस के पेड़ पर्यावरण को बहुत नुकसान पहुँचाने वाले हैं। हम यूकेलिप्टस तो खाएँगे नहीं, वे सिर्फ एक और अन्य व्यवसाय हैं। हम इसका विरोध कर रहे हैं क्योंकि हम पर्यावरण के रक्षक हैं और इससे केवल 40 परिवारों को फायदा होगा, पूरे समुदाय को नहीं।”

पराग्वे में सरकार अक्सर आर्थिक और ग्रामीण विकास के नाम पर यूकेलिप्टस जैसी गैर-देशी और हानिकारक प्रजातियों के साथ पुनः वनरोपण को बढ़ावा देती है और इसे एक पर्यावरणीय “उपलब्धि” के रूप में प्रस्तुत करती है। ग्रीन क्लाइमेट फंड (GCF), यूएन क्लाइमेट चेंज कन्वेंशन के फाइनेंसिंग मैकेनिज्म ने भी पैराग्वे में अब तक लगभग 10.2 करोड़ (102 मिलियन डॉलर) की चार परियोजनाएं प्रदान की हैं, जिनमें से एक जर्मनी स्थित निजी इक्विटी निवेश फर्म आरबेरो फंड के साथ है। GCF लैटिन अमेरिका और उप-सहारा अफ्रीका में सात लक्षित देशों में 75,000 हेक्टेयर नये वृक्षारोपण में निवेश करने की अपनी योजना का समर्थन कर रहा है, जो कथित तौर पर 2 करोड़ (20 मिलियन) टन कार्बन को कैप्चर करेगा।

वास्तव में वृक्षारोपण के लिये साफ की गई भूमि की तुलना में वृक्षारोपण में औसतन थोड़ा अधिक कार्बन होता है। यूकेलिप्टस के पेड़ों की नियमित रूप से, ज्यादातर केसों में हर 10 से 20 साल में,  कटाई की जाती है। सफाई, रोपण और कटाई का यह दोहयाये जाने वाला चक्र, और इसके साथ जो कार्बन छोड़ा जाता है, वह इन पुनः वनरोपण की पहलों के कथित लाभों को कम करता है। इसके विपरीत, औद्योगिक वृक्षारोपण की तुलना में प्राकृतिक वन 40 गुना अधिक कार्बन को कैप्चर करते हैं और तब तक ऐसा करना जारी रखते हैं जब तक वे अछूते बने रहते हैं। इससे पता चलता है कि प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र की तुलना में मोनोकल्चर वृक्षारोपण में निवेश कितना अधिक अप्रभावी है, और साथ ही यह एक ऐसा समाधान है जो स्वदेशी लोगों की संप्रभुता का उल्लंघन करता है।

मोनोकल्चर वृक्षारोपण में उर्वरकों और कृषि रसायनों का अंधाधुंध उपयोग शामिल है जो पानी और मिट्टी को प्रदूषित करते हैं। कृषिवानिकी (एग्रोफोरेस्ट्री) में विशेषज्ञता प्राप्त एक अंतरराष्ट्रीय संस्थान वर्ल्ड एग्रोफोरेस्ट्री सेंटर के अनुसार, एक औसत यूकेलिप्टस के पेड़ में प्रतिदिन 85 लीटर पानी की खपत होती है। पानी की स्थायी कमी वाले क्षेत्र में, इस पेड़ का मोनोकल्चर पहले से ही गंभीर स्थिति को अधिक खराब कर देगा। सांता रोजा के आस-पास के समुदायों में, ये वृक्षारोपण पहले से ही सूखे और जल भंडार की कमी के साथ-साथ मिट्टी की गिरावट और जैव विविधता के नुकसान का कारण बन रहा है।

बेहतर निवेश: स्वदेशी क्षेत्रीय संप्रभुता को सुरक्षित करना

खूम (Qom)  समुदाय के Organización de Mujeres Artesanas de Santa Rosa (सांता रोजा की कारीगर महिलाओं का संगठन) ने पर्यावरण अधिकारियों के पास शिकायत दर्ज की है और उनकी स्थिति के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिये प्रदर्शनों का मंचन किया है। नतीजतन, उन्हें शारीरिक हिंसा और धमकियों का भी सामना करना पड़ा है।

खूम (Qom) महिलाओं के लिये, क्षेत्रीय संप्रभुता को संरक्षित करने का अर्थ है भूमि के स्वामित्व और संसाधनों तक पहुँच का अधिकार; पहचान, संस्कृति और ज्ञान के संरक्षण का अधिकार; निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में भाग लेने का अधिकार; और स्वशासन का अधिकार। खूम (Qom) पहचान उनके क्षेत्रों के साथ उनके संबंधों से बहुत अधिक जुड़ी हुई है, और संप्रभुता के बिना, खूम (Qom) अपनी महत्वपूर्ण प्रथाओं को जारी नहीं रख सकता है, जो आगे जलवायु परिवर्तन शमन में योगदान करते हैं।

मोनोकल्चर वृक्षारोपण में निवेश करने से वह धन चला जाता है जिसका उपयोग पारिस्थितिक तंत्र को संरक्षित करने और स्वदेशी महिलाओं और सामुदायिक अधिकारों को मज़बूत करने के माध्यम से प्राकृतिक जल चक्र को बहाल करने के लिये किया जा सकता है। उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय जंगलों में संग्रहीत कुल कार्बन का कम से कम 22% सामूहिक रूप से प्रबंधित भूमि में निहित है, जिनमें से एक तिहाई उन क्षेत्रों में पाया जाता है जहाँ स्वदेशी लोगों और स्थानीय समुदायों को कानूनी मान्यता का अभाव है।

कई अध्ययनों से पता चलता है कि प्राकृतिक रूप से पुनर्जीवित होने के लिये जंगलों को अकेला छोड़ने से वाणिज्यिक वृक्षारोपण स्थापित करने की तुलना में 97% अधिक कार्बन कैप्चर लाभ मिलता है। ‘वनों की कटाई से बचने’ को शमन के लिये सबसे कम लागत वाले दृष्टिकोणों में से एक माना जाता है, लेकिन आज सामुदायिक भूमि अधिकारों को मान्यता देने पर आधारित समाधान, नष्ट हो रहे  वनों के स्वदेशी प्रबंधन का विस्तार करना प्राथमिकता प्रतीत नहीं होता है।

जेंडर-न्यायसंगत जलवायु समाधान महिलाओं और लड़कियों की स्वायत्तता, खाद्य संप्रभुता, प्राकृतिक संसाधन पर पहुँच और स्वास्थ्य में योगदान करते हैं साथ ही स्थानीय और पैतृक ज्ञान को पहचानते और शामिल करते हैं। स्वदेशी क्षेत्रीय संप्रभुता हासिल करने का जेंडर-न्यायपूर्ण जलवायु समाधान महत्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्र कार्यों की रक्षा और पुनर्स्थापित करने, जैव विविधता के संरक्षण, और कृषि व्यवसाय के कारण वन हानि और गिरावट की दरों को कम करने के लिये सबसे अधिक लागत प्रभावी, टिकाऊ और न्यायसंगत रणनीतियों में से एक है। नतीजतन, प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र और समुदाय दोनों अधिक लचीले हो जाते हैं और जलवायु झटकों को अनुकूलित करने और प्रतिक्रिया करने की उच्च क्षमता रखते हैं।

इस जेंडर-न्यायपूर्ण जलवायु समाधान का नेतृत्व कौन कर रहा है?

Organización de Mujeres Artesanas de Santa Rosa (सांता रोजा की कारीगर महिलाओं का संगठन) सामूहिक सांस्कृतिक और सामाजिक-पर्यावरणीय अधिकारों की रक्षा के लिये समर्पित है। उन्हें फोंडो मुजेरेस डेल सुर (Fondo Mujeres del Sur) का समर्थन प्राप्त है, जो ग्लोबल अलायंस फॉर ग्रीन एंड जेंडर एक्शन नेटवर्क का हिस्सा है। किसान और स्वदेशी महिला के संगठन कॉनमुरी (Conamuri) को फॉलो करें, जो सांता रोजा के खूम (Qom) समुदाय सहित पराग्वे में 12 विभागों की ग्रामीण महिलाओं के साथ काम करता है। आप यहाँ और भी जानकरी प्राप्त कर सकते हैं:


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