माया चोर्टी की महिलाओं ने अपने क्षेत्रीय अधिकारों और पानी की पहुँच को पुनः प्राप्त किया


लंबी कहानी छोटे में: इंटर-अमेरिकन डेवलपमेंट बैंक जैसे अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थान जैव ईंधन उत्पादन के झूठे जलवायु समाधान में निवेश करना जारी रखते हैं, जो लंबे समय से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को बढ़ाने, खाद्य आपूर्ति को खतरे में डालने और स्थानीय समुदायों को विस्थापित करने के लिये जाना जाता है। माया चोर्टी की महिलायें और उनके समुदाय जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के अनुकूल होने के लिये सही जलवायु समाधान – सामुदायिक जल प्रबंधन और फसल विविधीकरण – लागू कर रहे हैं।

अब की वास्तविकता: जैव ईंधन उत्पादन के लिये बड़े कृषि व्यवसाय में निवेश

17 साल से माया चोर्टी के लोग उस ज़मीन का मालिकाना हक मांग रहे हैं जहाँ पीढ़ियों से वे और उनके पूर्वज रहते थे। सामुदायिक भूमि पर चोर्टी की उपाधि से वंचित करने का मतलब उन्हें पानी और खाद्य सुरक्षा तक पहुँच से वंचित करना है। एक पहल जो चोर्टी को उनकी भूमि से वंचित कर रही है, वह है मोनोकल्चर (एकल कृषि) फसल जटरोफा का विस्तार, जिसे उनके इलाके में इथेनॉल ईंधन के उत्पादन के लिये, स्थानीय रूप से पिनोन के रूप में जाना जाता है । बड़ी जैव ईंधन कंपनियां जल संसाधनों पर एकाधिकार कर रही हैं और स्थानीय समुदायों को उनकी भूमि से विस्थापित कर रही हैं।

ग्वाटेमाला में गन्ना, जटरोफा और तेल ताड़ (पाम) मोनोकल्चर वृक्षारोपण जैव ईंधन की यूरोपीय मांग को पूरा करने के लिये हिस्सों में विस्तार कर रहे हैं। इन फसलों से बने बायोडीजल को लंबे समय से डीजल ईंधन के लिये एक आशाजनक अक्षय ऊर्जा विकल्प के रूप में पहचाना जाता है। हालाँकि, शोधकर्ता वर्षों से अध्ययन प्रकाशित कर रहे हैं जिससे साबित होता है कि जैव ईंधन आसान जलवायु समाधान नहीं है जैसा कि राजनेताओं और निगमों ने उन्हें बताया है। 2007 के नोबेल पुरस्कार विजेता रसायनज्ञ पॉल क्रुटजेन के एक अध्ययन में पाया गया कि कई जैव ईंधनों को उगाने और जलाने से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम होने के बजाय बढ़ता है, इसके अलावा यह  अध्ययन बताता है कि जैव ईंधन से खाद्य आपूर्तियों और किसानों की आजीविका को खतरा है।

ग्वाटेमाला विश्व स्तर पर चीनी का चौथा सबसे बड़ा निर्यातक है और मध्य अमेरिका के गन्ना इथेनॉल का लगभग 44% उत्पादन करता है। संयुक्त राज्य अमेरिका और वर्ल्ड बैंक, इंटर-अमेरिकन डेवलपमेंट बैंक (IDB) और सेंट्रल अमेरिकन बैंक फॉर इकोनॉमिक इंटीग्रेशन जैसे अंतर्राष्ट्रीय ऋण संस्थानों ने ग्वाटेमाला के इस ऊर्जा स्रोत के उत्पादन में भारी निवेश किया है। इंटर-अमेरिकन डेवलपमेंट बैंक ने कहा कि उद्योग ग्वाटेमाला की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नकदी और नौकरियों का संचार कर सकता है, अगर इसे सही तरीके से विकसित किया जाये। उन्होंने ग्वाटेमाला सहित लैटिन अमेरिका में “चीनी और बायोएनेर्जी कंपनियों और निर्यातकों” को वित्तपोषित करने के लिये 15 करोड़ (US$150 मिलियन) आवंटित किये।

कारों में जैव ईंधन के बढ़ते उपयोग को अनिवार्य करने वाले संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोप में कानूनों ने खाद्य कीमतों में वृद्धि और एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में खाद्य-आधारित कृषि के लिये भूमि के कम होने में योगदान दिया। इसके परिणामस्वरूप कई उद्योगों ने जटरोफा की ओर रुख किया, एक अखाद्य खरपतवार जो खाद्य फसलों के लिये कम उपयुक्त भूमि में उगता है और कम भूमि में तेल की उच्च उपज पैदा करता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि गन्ना और मकई की तुलना में जटरोफा को प्रति यूनिट ऊर्जा के लिये पाँच गुना अधिक पानी की आवश्यकता होती है, और ग्वाटेमाला में उत्पादित प्रत्येक लीटर बायोडीजल के लिये औसतन 20,000 लीटर पानी की आवश्यकता होती है।

बेहतर निवेश: सामुदायिक जल प्रबंधन और फसल विविधीकरण

भले ही चोर्टी इलाकों को पुनः प्राप्त कर रहे हैं, सरकार और किसान द्वारा प्राकृतिक संसाधनों और आजीविका के अपने अधिग्रहीत अधिकारों का उल्लंघन करना जारी है। कुछ नगर पालिकाओं ने अभी भी स्वदेशी समुदायों के नाम पर भूमि पंजीकृत करने से इनकार कर दिया है। जवाब में, 2019 में चोर्टी की महिलाओं ने आगे बढ़ने के तीन तरीके प्रस्तावित किये: सामुदायिक इलाक़ों – मुख्य रूप से जहाँ जल स्रोत स्थित हैं – के लिये एक नीति का कार्यान्वयन; परिवारों के लिये पानी की पहुँच सुनिश्चित करने के लिये जलाशयों का निर्माण; और न्याय की अदालतों के समक्ष निरंतर कार्रवाइयां जो स्वदेशी समुदायों के अधिकारों को वैध बनाती हैं और उन लोगों को जवाबदेह ठहराती हैं जो स्वदेशी क्षेत्रों में पर्यावरणीय क्षति के लिये ज़िम्मेदार हैं।

एक समुदाय में, नगरपालिका के मेयर के पास की एक झील के सूख जाने के बाद, झील पर निर्भर स्वदेशी परिवारों को अपने घरों से एक किलोमीटर दूर पर स्थित पानी को इकट्ठा करने और ले जाने के लिये मज़बूर होना पड़ा। COMUNDICH के सहयोग से, समुदाय ने अपना पानी जमा करने के लिये एक जलाशय का निर्माण किया।

जलवायु परिवर्तन और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के तेज़ विनाश ने कृषि पर निर्भर चोर्टी समुदाय के पानी और आजीविका की उपलब्धता को प्रभावित किया है। उनकी सेम और मकई की मुख्य फसलें जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाले लगातार सूखे की चपेट में हैं, और महामारी के दौरान कई लोगों की फसलें विफल हो गईं, जिससे उन्हें पूरी तरह से मकई और कुछ बुनियादी अनाज पर जीवित रहना पड़ा।

समुदाय अपने जलाशय से पानी के साथ, अपनी फसलों में विविधता लाने और देशी प्रजातियों को लगाने में सक्षम हो गया है जो पर्यावरण के लिये बेहतर अनुकूलित हैं। इस फसल विविधीकरण ने उनके आहार में सुधार किया है और उनकी भूमि के उपयोग को अनुकूलित किया है। इन उद्यानों ने महामारी के दौरान परिवारों को भोजन की कमी से निपटने में भी मदद की है, और अब वे एक नया जलाशय बनाने की योजना बना रहे हैं जिससे इस समुदाय के 40 से अधिक परिवारों को, खासकर सूखे के समय में, लाभ होगा।

आज, चोर्टी की महिलायें पानी के रक्षण और संरक्षण पर अपने पैतृक ज्ञान को अभी भी व्यवहार में ला रही हैं, और ऐसी कानूनी कार्यवाही करती हैं जो उन्हें उनके उचित भूमि अधिकार प्रदान करेगी और उनके जल स्रोतों तक पहुँच की गारंटी देगी।

इस जेंडर-न्यायपूर्ण जलवायु समाधान का नेतृत्व कौन कर रहा है?

स्वदेशी माया चोर्टी की महिलाओं और COMUNDICH के नेटवर्क को Fondo Tierra Viva का समर्थन प्राप्त है, जो GAGGA नेटवर्क का हिस्सा है। आप COMUNDICH के कार्य को यहाँ फॉलो कर सकते हैं।

 


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